मौन
तू मौन रह तू मौन रह , तू मौन रह तू मौन रह ... मौन का ये अर्थ है कि शब्द सारे व्यर्थ हैं , वेद सारे लील जाए , मौन यूँ समर्थ है। चीख़ चीख़ शब्द उड़ें , शांत स्मित मौन है , मौन की ही मार से शब्द सब स्तब्ध हैं। शब्द सीमित हैं मगर , मौन तो विस्तार है , श्रम ही श्रम है शब्द में , मौन में विश्राम है। मौन में ही शक्ति है , मौन में ही भक्ति है , ध्यान में भी मौन है , मौन में विरक्ति है। प्रेम और करुणा के भाव सारे मौन हैं , शांत ...